लालकिताब के अनुसार मंगल
लालकिताब के अनुसार मंगल को भाई, दोस्त, Business Partner ,मांगलीक कार्य, खुशियाँ, आनेवाला कर्ज, गुस्सा और ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।
जिसका मंगल अच्छा होता है वो जीवन में ज्यादा पैसा नहीं कमाता और जिसका मंगल खराब होता है वो पैसे के मामले में बेहतरीन प्रदर्शन करता है। अब पहले हम देखते हैं कि किस स्थिति में मंगल को अच्छा और किस स्थिति में खराब जानना चाहिए।
खराब मंगल की स्थितियां
(१) यदि किसी जातक की कुंडली में शनि और सूर्य ग्रह साथ साथ एक ही भाव में बैठे हों तो मंगल खराब होता है फिर चाहे वह कहीं भी बैठा हो।
(२) यदि मंगल ग्रह बुध ग्रह के साथ बैठा हो तो मंगल खराब है।
(३) जिन जातकों का शुक्र ग्रह नौवें भाव में बैठा होता है उनका मंगल ग्रह खराब होता है।
(४) कुण्डली में गुरु यदि सप्तम स्थान में विराजमान हो तो मंगल खराब है।
(५) जिन जातकों की अपने भाईयों से अनबन या लडाई झगड़ा रहता है उनका भी मंगल खराब होता है।
अब देखते हैं कि मंगल किन अवस्थाओं में अच्छा समझा जाता है-
(१) सूर्य के साथ बुध बैठा हो तो मंगल को अच्छा जाने।
(२) सूर्य तृतीय या षष्ठ भाव में हो तो मंगल अच्छा है।
(३) चंद्रमा यदि प्रथम, द्वितीय, तृतीय अथवा अष्टम में विराजमान हो तो मंगल अच्छा है।
(४) शनि, बुध और सूर्य एक साथ हों तो दोनों तरह के परिणाम मिलते हैं।
(५) सूर्य, बुध और मंगल एक साथ हों तो भी दोनों तरह के परिणाम मिलते हैं।
अब जानते हैं कि कुण्डली के भावानुसार मंगल क्या परिणाम देता है और क्या उपाय हो सकते हैं-
प्रथम भाव से षष्ठ भाव तक मंगल
(1) जिन व्यक्तियों के प्रथम भाव में मंगल होता है उनके चेहरे पर मस्सा या चोट के निशान मिलते हैं। 28 वर्ष तक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, उसके बाद पैसा और पावर दोनों अर्जित करते हैं। नौकरी भी 28 के बाद ही हाथ आती है। ऐसे जातक ऊर्जा से भरपूर होते हैं। हमेशा बड़ा करने की चाह रखते हैं और अपनी उपलब्धियों से सन्तुष्ट नहीं होते। सरकार अथवा सरकारी नौकरी से लाभ मिलता है। लौहे, लकड़ी या मशीनरी कार्य फलता फूलता है। इन्हें सच बोलना अच्छा लगता है और इनका श्राप भी लग जाता है इसलिए इनके साथ अच्छा व्यवहार रखें और इनके सामने किसी दूसरे के साथ भी बुरा बर्ताव न करें। उपाय – जिनका मंगल प्रथम भाव में है उन्हें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए १ भण्डारे में फ्री में भोजन न करें। २ हाथीदांत घर में न रखें। ३ हाथी का फोटो या हाथी से सम्बन्धित कोई भी चीज घर में न रखें, जो सफेद मारबल से बनी हो।
(2) लालकिताब के अनुसार द्वितीय भाव में मंगल हो तो ऐसे जातक घर में बड़े होते हैं अथवा बड़ों की तरह व्यवहार करते हैं या बड़ों की जिम्मेदारी इनके कंधों पर होती है। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। ऐसे जातकों के घर मेहमान बहुत आते हैं और मेहमान नवाजी भी अच्छी होती है। इनको ससुराल पक्ष से प्रॉपर्टी मिल सकती है। ससुराल वालों के साथ मिलकर या उनकी सलाह से किया हुआ काम फायदा देता है। इनकी ऊर्जा पैसा कमाने के लिए लगती है। यदि मंगल के साथ बुध बैठा हो तो परिणाम उल्टे मिल सकते हैं। उपाय- १ पीतल या लाल रंग के हिरण की मूर्ति ऐसी जगह लगाएं जो आपको दीखती रहे। २ कपड़ों का काम या लिक्विड का काम फलदायी होता है।
(3) जिन जातकों के तृतीय भाव में मंगल बैठा होता है उनको बकरियों में पाला गया शेर कहा जाता है। इनको इनकी ताकत याद दिलाने के लिए किसी की जरूरत पड़ती है। बचपन में आर्मी या पुलिस में जाने का मन होता है। इनके घर या आस-पड़ोस में कानून से सम्बंधित व्यक्ति होता है अथवा ऐसे जातकों की अपने पड़ोसियों से नहीं बनती। ऐसे जातक खाओ पीओ और मस्त रहो के सूत्र पर चलते हैं। 30 की उम्र के आसपास BP की समस्या हो जाती है। उपाय- १ चांदी का कड़ा पहने। २ अपने भाईयों से बनाकर रखें, अन्यथा सभी काम बिगड़ सकते हैं।
(4) लालकिताब के अनुसार जिन जातकों के चतुर्थ स्थान में मंगल होता है उनकी माता की सेहत हर आठ वर्ष बाद खराब होती है। जैसे- 8, 16,24,32 … । इनके घर में क्लेशी लोगों का वास होता है। इनकी सारी ऊर्जा घर का माहौल सुधारने में खर्च होती है। इनके अंदर भी गुस्सा शिखर पर होता है। पेट की समस्या होती है और 40-45 की उम्र में सर्जरी भी हो सकती है। उपाय – १ चांदी का चौकोर टुकड़ा हमेशा अपनी जेब में रखें। २ मंगलवार के दिन बरगद की जड़ में दूध डालकर उतनी मिट्टी वहां से उठाकर घर ले आएं और हर रोज उसी मिट्टी से तिलक करें।
(5) कुण्डली में पञ्चम भाव में मंगल होने पर बड़ा शुभ माना जाता है। इन जातकों की जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे वैसे पैसा बढ़ता है। घर का कोई व्यक्ति सेना, पुलिस या न्याय के कार्य में हो सकता है।ऐसे लोगों के पूर्वज अमीर हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ साथ इन जातकों को सब कुछ मिल जाता है। कोई भी अफेयर ऐसे लोगों को बर्बाद कर देता है। अफेयर के बाद पैसा आना बंद हो जाता है। उपाय – १ कभी भी अफेयर न करें। २ घर में नीम का पौधा लगाएं।
(6) जिन जातकों के षष्ठ भाव में मंगल विराजमान होता है उनके घरों में कोई भी अच्छा कार्य होने से पहले महाभारत होती है। छठे मंगल वाले व्यक्ति के कमर में दर्द, पैरों में दर्द और घुटनों में दर्द होता है। ऐसे लोगों के पुत्र संतानहोने में कष्ट होता है। यदि पुत्र संतान हो जाए तो बिमार रहती है। छठे मंगल सरकारी नौकरी अथवा सरकारी लाभ दिलाता है। उपाय- १ ना मीठा खाएं और ना मीठा खीलाएं। २ गणपति जी की पूजा करें। ३ ऐसे जातकों के बच्चे को सोना नहीं पहनना चाहिए, नहीं तो हानि होती है।
सप्तम भाव से द्वादश भाव तक मंगल
(7) सप्तम भाव का मंगल अत्यधिक प्रभावी मांगलीक बनाता है। ऐसे जातक अपना घर बनाते हैं, दो-तीन भी बना सकते हैं। सातवें भाव का मंगल बहुत ही ताकतवर होता है। यदि ऐसे जातकों के पति या पत्नी मांगलीक न हों तो उनकी सेहत खराब रहती है या जातक की उनसे अनबन रहती है। सातवें मंगल वाले जातक जो सोचते हैं उन्हें वो मिल जाता है। परन्तु यदि मंगल के साथ बुध बैठा हो तो कोई इच्छा पूरी नहीं होती। मांगलीक होना सौभाग्य की बात है ऐसे जातक बहुत ज्यादा ऊर्जावान होते हैं। ये अपने पार्टनर के लिए बहुत ज्यादा सुरक्षात्मक होते हैं। अपने कार्य के लिए ऊर्जा झोंक देते हैं। यदि मंगल पहले और सातवें भाव में शुक्र के साथ स्थान युति में हो तो ऐसे जातकों में कामवासना बहुत ही अधिक होती है। ऐसे लोग कामवासना के लिए पैसा भी खर्च कर सकते हैं। अगर मंगल सातवें होकर खराब हो और विवाह में समस्या दे रहा हो तो घर में माता की बहुत सारी चुनरियाँ हो सकती हैं। घर में बेलदार पौधे हो सकते हैं। इन्हें तुरन्त हटाएँ। घर में बांसुरी गिटार आदि वाद्ययंत्र मिल सकते हैं, इन्हें तुरंत हटाएं नहीं तो मंगल खराब ही रहेगा। उपाय – १व्यायाम और कसरत करें। धार्मिक बनें। धर्मस्थलों की यात्रा करें। २ विष्णु जी को भोग लगाकर मीठे हलवे का दान करें।
(8) अष्टम भाव के मंगल वाले जातकों का अपने भाई के साथ आयु का अंतराल 4 या 8 वर्ष हो सकता है। यदि कोई छोटा भाई हो तो उसके कैरियर में समस्या आ सकती है। आठवें खराब मंगल वाला आदमी अपनी बात को पूरा नहीं कर पाता। आंखों और पीठ की बिमारी हो सकती है। यदि आठवें मंगल के साथ शनि भी हो तो जातक बहुत सारी प्रॉपर्टी का मालिक बन सकता है। रियल स्टेट में गजब का काम करता है। आठवें मंगल वाले व्यक्ति को लाईफ पार्टनर या बिजनेस पार्टनर धोखा दे सकता है। अष्टम भाव में राहु के साथ मंगल अच्छे परिणाम नहीं देता, जब भी राहु की दशा होती है तो बहुत ज्यादा शारीरिक समस्या दे सकता है। वैसे भी मंगल राहु के साथ अच्छा नहीं माना जाता है। मंगल और राहु की सहस्थान युति कोर्ट और एक्सीडेंट को प्रोत्साहन देती है। उपाय – १ चावल के साथ गुड़़ का दान मंदिर में करें। २ तीनों वक्त के भोजन में से एक समय का भोजन रसोई में बैठकर करें।
(9) जिन जातकों का मंगल नवम भाव में बैठता है, उनकी सरकारी नौकरी लगती है।बड़े घर-परिवार में रहते हैं। भाई की शादी के बाद भाग्योदय होता है। भाई के साथ काम करना शुभ होता है।ऐसे लोग बड़ों की इज्ज़त करते हैं और बड़ों के आशीर्वाद से अच्छा प्रदर्शन करते हैं। अगर ऐसे जातक नास्तिक हों जाएं तो बहुत बुरे वक्त से इनको गुजरना पड़ता है। अन्तर्जातीय अथवा अन्तर्धर्म विवाह बहुत ही हानिकारक होता है। उपाय- १ जरूरतमंद लोगों को दूध+ चावल का दान लगातार 51 दिन तक करें। २ अन्तर्धर्म या अन्तर्जातीय विवाह भूलकर भी न करें।
(10) दशम स्थान का मंगल सबसे शक्तिशाली बताया गया है। ऐसे जातक कुलदीपक होते हैं।पूरे परिवार में नाम कमाते हैं। ऐसे लोग कर्मयोगी होते हैं। अपने दम पर अपना नाम स्थापित करते हैं। जब भी दूध उबालते हैं तो दूध निकल जाता है या जल जाता है। यदि मंगल दसवें और शनि तीसरे स्थान में विराजमान हो तो अरबपति बनते हैं।बहुत ही ऊर्जावान होते हैं। ऐसे लोगों को पूर्वजों की सम्पत्ति और सोना ना तो बेचना चाहिए और ना ही गिरवी रखना चाहिए, ये इनकी बर्बादी का कारण बन सकता है। यदि इनको बेचकर या गिरवी रखकर उससे ज्यादा लाभ का काम कर रहे हो तो दिक्कत नहीं है। उपाय – १ पीतल का हिरण पश्चिम दिशा में रखें। २ काले चने का दान करें। ३ पांचमुखी+सातमुखी अभिमन्त्रित रूद्राक्ष धारण करें। ४ यदि गुस्सा आता है तो चांदी के गिलास में पानी पीएं। एक्सरसाइज करें।
(11) एकादश स्थान का मंगल आय के रास्ते खोलता है। एक से अधिक आमदनी के जरिए होते हैं। कहीं न कहीं से पैसा आता रहता है। आलसी लोग अच्छा पैसा नहीं कमा पाते। इन जातकों की माता की सेहत खराब रहती है। दोस्तों से झगड़ा हो सकता है। दोस्तों से धोखा मिल सकता है अथवा दोस्तों में पैसा डूब सकता है। उपाय – १ मिट्टी के छोटे कुल्हड़ में शहद+सिन्दूर डालकर कपडे में अच्छी तरह से बांधकर अपने बैड के नीचे या आसपास 43 दिन तक रखें और बाद में उसे निर्जन स्थान पर छोड़ आएं। २ दोस्त जरूर बनाएं दोस्तों का न होना भी हानिकारक हो सकता है परन्तु सावधान रहें।
(12) जिन जातकों का मंगल द्वादश भाव में उपस्थित होता है ये बहुत पावरफुल है। ये कुण्डली में राहु को पूर्णतया नियन्त्रित करता है चाहे राहु कहीं भी बैठा हो, तो राहु जातक को परेशान नहीं कर पाता। द्वादश स्थित मंगल अन्य सभी ग्रहों को भी कण्ट्रोल करने की शक्ति रखता है।ऐसे जातकों के घर के पास अस्पताल होता है अथवा घर में ही अस्पताल होता है अर्थात् घर पर बहुत सी दवाएं होती हैं। मंगल+ राहु अंगारक योग बनाते हैं, जिससे खून से संबंधित बिमारियां होती हैं। मंगल+ केतु ऐसे बिमारी देते हैं, जो डॉक्टर की भी समझ से बाहर होती हैं। उपाय १ सुबह उठकर पानी में शहद मिलाकर पीएं।
शिवपुराण में लिंगस्वरूप शिव का विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक करने का अलग- अलग फल बताया गया है।
शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा।
श्लोक
जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै
दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै।
मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा।
पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।।
बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना।
जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।।
घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्।
तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः।
प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम।
केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः।
शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्।
श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!!
सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह!
पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधिः सर्पिषा तथा।।
जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।
पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा।
महलिंगाभिषेकेन सुप्रीतः शंकरो मुदा।
कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम्।
अर्थात
जल से रुद्राभिषेक करने पर — वृष्टि होती है।
कुशा जल से अभिषेक करने पर — रोग, दुःख से छुटकारा मिलता है।
दही से अभिषेक करने पर — पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
गन्ने के रस से अभिषेक करने पर — लक्ष्मी प्राप्ति होती है।
मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर — धन वृद्धि होती है।
तीर्थ जल से अभिषेकक करने पर — मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इत्र मिले जल से अभिषेक करने से — बीमारी नष्ट होती है ।
दूध से अभिषेक करने से — पुत्र प्राप्ति, प्रमेह आदि रोगों की शान्ति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गंगाजल से अभिषेक करने से — ज्वर ठीक हो जाता है।
शर्करा मिश्रित दूध से अभिषेक करने से — सद्बुद्धि प्राप्ति होती है।
घी से अभिषेक करने से –– वंश विस्तार होता है।
सरसों के तेल से अभिषेक करने से – रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने से —- पाप क्षय होता है।
इस प्रकार शिव के रूद्र रूप के पूजन और अभिषेक करने से जाने-अनजाने होने वाले पापाचरण से भक्तों को शीघ्र ही छुटकारा मिल जाता है और साधक में शिवत्व रूप सत्यं शिवम सुन्दरम् का उदय हो जाता है उसके बाद शिव के शुभाशीर्वाद से समृद्धि, धन-धान्य, विद्या और संतान की प्राप्ति के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
वागार्थविव सम्पृक्तौ वागार्थ प्रतिपत्तये।
जगतः पितरौ वन्दे पार्वतीपरमेश्वरौ।।
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