रूद्राक्ष

रूद्राक्ष

त्रिपुर वध में रुद्रदेव की आंखों से जो आंसू गिरे वही प्रसिद्ध रुद्राक्ष बने –
त्रिपुरस्य वधे काले रुद्रस्याक्ष्णोऽपतंस्तु ये । अश्रुणो बिन्दवस्ते तु रुद्राक्षा अभवन् भुवि ॥
प्रमाणिक रूप से रुद्राक्ष एक से 14 मुखी तक उपलब्ध होते हैं। आजकल बाजारीकरण के चलते एक से इक्कीस मुखी तक भी रूद्राक्ष उपलब्ध होते हैं। लेने वाले को इनकी प्रमाणिकता की जांच कर लेनी चाहिए। रूद्राक्ष हमें दो वैरायटी में प्राप्त होते हैं। नेपाली और इंडोनेशियाई। इनमें नेपाली रूद्राक्ष को ज्यादा प्रभावी समझा जाता है। जिस रूद्राक्ष के मुख स्पष्ट होते हैं वो अधिक फलदायी सिद्ध होते हैं। फिर भी पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे ज्यादा पेड़ पर लगते हैं और उनकी सुंदरता और असली होना ज्यादा प्रमाणित है।
पंचमुखी रुद्राक्ष कालाग्नि नाम के कहे गए हैं ।
इनके धारण करने से अगम्यागमन अभक्ष्य भक्षण जैसे पापों से भी व्यक्ति मुक्त हो सकता है-
पञ्चवक्त्रः स्वयं रुद्रः कालाग्निर्नाम नामतः । अगम्यागमनाच्चैव अभक्षस्य च भक्षणात् । मुच्यते सर्व्वपापेभ्यः पञ्चवक्त्रस्य धारणात् ॥
#हूं_नमः इस मंत्र के प्रत्येक रुद्राक्ष को पुष्प से स्पर्श करते हुए 108 बार जप करें। फिर शिवलिंग के साथ रखकर अभिषेक करके धारण करें।
बिना मंत्र जप के रुद्राक्ष धारण करना पाप कहा गया–
हूं नमः इति प्रत्येकमष्टोत्तरशतं जप्ता शिवाम्भसा प्रक्षाल्य धारणीयम् ।
“ विना मन्त्रेण यो धत्ते रुद्राक्षं भुवि मानवाः । स याति नरकं घोरं यावदिन्द्राश्चतुर्द्दश ॥
बिना रुद्राक्ष धारण किए जो भी जब तक किया जाता है वह व्यर्थ हो जाता है-
अरुद्राक्षधरो भूत्वा यद्यत् कर्म्म च वैदिकम् । करोति जपहोमादि तत् सर्व्वं निष्फलं भवेत् ॥ “ स्कान्दे ।
रुद्राक्ष पहनने से मनुष्य देव स्वरूप हो जाता है-
रुद्राक्षधारणादेव नरो देवत्वमाप्नुयात् ॥

एक से चौदह मुखी रूद्राक्ष

1 एक मुखी रुद्राक्ष साक्षात् शिव है वह ब्रह्महत्या को दूर करता है तथा अग्नि स्तंभन और अमरता प्राप्त होती है –
एकवक्त्रः शिवः साक्षात् ब्रह्महत्यां व्यपोहति । अवध्यत्वं प्रतिश्रोतो वह्निस्तम्भं करोति च ॥
एकमुखी रूद्राक्ष सूर्य ग्रह से सम्बंधित है। इसको धारण करने से समाज में प्रभाव बढ़ता है और बड़े अधिकारियों से सम्बन्धों में दृढ़ता आती है, सरकारी अधिकारियों से सम्बंधित प्रोजेक्ट पर कार्य करने वाले व्यक्ति को एकमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
2 दो मुखी रुद्राक्ष हरगौरी कहा गया है अर्थात् माता पार्वती और भगवान शिव का स्वरूप है। गोवध आदि पापों को वह दूर करता है-
द्विवक्त्रे हरगौरी स्यात् गोवधाद्यघनाशकृत् ।
दोमुखी रूद्राक्ष चन्द्रमा का प्रतीक है। इसको धारण करने से स्वभाव में शीतलता आती है। जिन लोगों को अनावश्यक बहुत गुस्सा आता है उन्हें ये रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
3 तीन मुखी रुद्राक्ष साक्षात् अग्नि हैं, जो तीन जन्मों के पापों को भस्म करता है -त्रिवक्त्रोऽग्निस्त्रिजन्मोत्थपापराशिं प्रणाशयेत् ॥ तुलाराशिं यथा वह्निर्भस्मसात् कुरुते हर ! । त्रिवक्त्रोऽपि चरुद्राक्षस्तथा दहति किल्विषम् ॥
तीन मुखी रूद्राक्ष मंगल ग्रह का प्रतिनिधि है। जो व्यक्ति किसी भी कार्य को करने का साहस नहीं जुटा पाते उन्हें इस रूद्राक्ष को धारण करना चाहिए।
4 चारमुखी रुद्राक्ष ब्रह्मा जी के समान कहां गया है वह नर हत्या को दूर करता है–चतुर्व्वक्त्रस्तु धाता स्यात् नरहत्यां व्यपोहति । बिजनेस में उन्नति के लिए चार मुखी रूद्राक्ष बहुत ही असरदार सिद्ध होता है।
ग्रहों की बात की जाए तो चारमुखी रूद्राक्ष बुध को इंगित करता है। जिन लोगों की वाणी प्रभावी नहीं है अर्थात् जिनकी बातें वजनदार नहीं समझी जाती हैं। उन्हें इस रूद्राक्ष को धारण करना चाहिए।
जो लोग बात-बात पर गाली-गलौज करते हैं उनका भी बुध खराब हो जाता है। इसलिए कभी भी गाली या अपशब्द न कहें।
5 पंचमुखी रुद्राक्ष साक्षात्कालाग्नि है उसका फल ऊपर लिखा गया है-
पञ्चवक्त्रस्तु कालाग्निरगम्याभक्ष्यपापनुत् ॥
पांच मुखी रूद्राक्ष बृहस्पति ग्रह का प्रतीक है। ये रूद्राक्ष बुरी नजर से बचाव करता है। इसे हर आदमी पहन सकता है।
6 छहमुखी रुद्राक्ष साक्षात कार्तिकेय हैं। वह गर्भ हत्या आदि दोषों को दूर करता है तथा बालकों की रक्षा करता है—
षड्वक्त्रो यो गुहः साक्षात् गर्भहत्यां शमेदयम् ।
जब बात ग्रहों की हो तो यह रूद्राक्ष शुक्र का प्रतिनिधित्व करता है। जिन लोगों को प्रेम सम्बन्धों में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो वो लोग छह मुखी रूद्राक्ष को धारण कर सकते हैं।
7 सात मुखी रुद्राक्ष अनंत है वह स्वर्ण चोरी आदि पापों को हटाता है —
सप्तवक्त्रो ह्यनन्तश्च स्वर्णस्तेयाघनुत् सदा ॥
इसे माता लक्ष्मी का प्रतीक समझा जाता है। लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने के लिए भी इस रूद्राक्ष को धारण किया जाता है। ग्रहों में यह शनि ग्रह को प्रस्तुत करता है। जिन लोगों पर शनिदेव की साढेसाती या ढय्या चल रहा हो उनको यह रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। बिजनेस में बढोत्तरी के लिए भी सातमुखी रूद्राक्ष का सुझाव दिया जाता है।
8 अष्ट मुखी रुद्राक्ष साक्षात गणेश जी है वह समस्त असत्य भाषण से उत्पन्न पापों को दूर करता है –
विनायकोऽष्टवक्त्रः स्यात् सर्व्वानृतविनाशकृत् ।
राहु ग्रह को रिप्रेजेंट करनेवाला यह रूद्राक्ष कमजोर स्वभाव वाले लोगों के लिए है, जो लोग सही फैसले लेने में कमजोर हैं उन्हें यह धारण करना चाहिए। इससे व्यक्ति असरदार कदम उठा पाता है
9 नौमुखी रुद्राक्ष साक्षात भैरव है वह शिव के साथ व्यक्ति को सायुज्यता प्रदान करता है—
भैरवो नववक्त्रः स्यात् शिवसायुज्यदायकः ॥
केतु ग्रह से सम्बंधित समस्या के लिए यह रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
10 मुखी रुद्राक्ष एवं विष्णु स्वरुप है भूत प्रेत पिशाच आदि को दूर हटाता है-दशवक्त्रः स्वयं विष्णुर्भूतप्रेतपिशाचहा ।
दशमुखी रूद्राक्ष नवग्रहों का प्रतीक है। जब समस्याएं बहुत ज्यादा हों तो यह व्यक्ति को समस्याओं से उबारने में बहुत सहायक है। यह रूद्राक्ष जातक को प्रसिद्धि भी प्रदान करता है।
11 ग्यारहमुखी रुद्राक्ष साक्षात् रूद्र स्वरूप है वह अनेक यज्ञों का फल प्रदान करता है-एकादशमुखो रुद्रो नानायज्ञफलप्रदः ॥
यह रूद्राक्ष जातक के पापों का शमन करता है। यह ग्यारह रूद्रों का स्वरूप है। कोर्ट-केस आदि में सफलता प्राप्त करने के लिए ग्यारह मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
12 बारहमुखी रुद्राक्ष सूर्य स्वरूप है वह समस्त तीर्थों के फल को प्रदान करता है–द्वादशास्यो भवेदर्कः सर्व्वतीर्थफलप्रदः ।इसे द्वादश आदित्य समझा जाता है। इसको धारण करने वाले जातक को अपने पिता और पिता-स्वरूप बुजुर्गों से अच्छे सम्बन्ध रखने चाहिए।
13 तेरहमुखी रुद्राक्ष स्वयं कामदेव स्वरूप है समस्त कामनाओं को पूर्ण करता है-त्रयोदशमुखः कामः सर्व्वकामफलप्रदः ॥
इसे साक्षात् शुक्र कहा जाता है जब Love Life में बहुत ज्यादा दिक्कतें आ रही हों तो तेरहमुखी रूद्राक्ष धारण करना फलदायी होता है।
14 मुखी रुद्राक्ष श्रीकांत स्वरूप है वह वंशवृद्धि करता है—
चतुर्द्दशास्यः श्रीकण्ठो वंशोद्धारकरः स्मृतः ।
जिन लोगों को वंशवृद्धि में समस्याओं का सामना पड़ रहा है उन्हें इस रूद्राक्ष को धारण करना चाहिए। जो लोग बहुत पैसा कमाने की चाह रखते हैं। उन्हें भी यह रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। यह नये रास्ते खोलता है।

अन्य रूद्राक्ष

15 पंद्रह मुखी रूद्राक्ष उन लोगों को धारण करना चाहिए , जो बड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम करते हैं और जिनमें करोड़ों की डील संसाधित की जाती हैं।
रूद्राक्ष का एक अन्य प्रकार गर्भ-गौरी रूद्राक्ष भी है। यह रूद्राक्ष गर्भ की रक्षा के लिए धारण किया जाता है। जिन महिलाओं का बार-बार गर्भ क्षरित होता है, उन्हें यह रूद्राक्ष धारण करना फलदायक होता है।
सभी कार्यों में शीघ्रातिशीघ्र सफलता के लिए सिद्धमाला धारण करना उपयोगी सिद्ध होता है। सिद्धमाला में एक मुखी रूद्राक्ष से चौदह मुखी रूद्राक्ष तक के मनके होते हैं।

आजकल बाजारीकरण के चलते एक से इक्कीस मुखी तक भी रूद्राक्ष उपलब्ध होते हैं। लेने वाले को इनकी प्रमाणिकता की जांच कर लेनी चाहिए। रूद्राक्ष हमें दो वैरायटी में प्राप्त होते हैं। नेपाली और इंडोनेशियाई। इनमें नेपाली रूद्राक्ष को ज्यादा प्रभावी समझा जाता है। जिस रूद्राक्ष के मुख स्पष्ट होते हैं वो अधिक फलदायी सिद्ध होते हैं।

रूद्राक्ष धारण विधि और मन्त्र

रुद्राक्ष को पंचगव्य से स्नान कराकर उसकी प्रतिष्ठा के लिए शिव पंचाक्षर मंत्र का जप करें अथवा त्र्यंबक मंत्र का जप या अघोर मंत्र का जप भी कर सकते हैं-रुद्राक्षस्य प्रतिष्ठायां मन्त्रं पञ्चाक्षरं तथा । त्र्यम्बकादिकमन्त्रञ्च तथा तत्र प्रयोजयेत् ॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम् । उर्व्वारुकमिव वन्धनान्मृत्योर्मुक्षीयमामृतात् ॥
तथा ॐ हौं अघोरे हौं घोरे हूं घोरघोरतरे ॐ ह्रैं ह्रीं श्रीं ऐं सर्व्वतः सर्व्वसर्व्वेभ्यो नमस्तेऽस्तु रुद्ररूपिणे हूं हूं । अनेनापि च मन्त्रेण रुद्राक्षस्य द्विजोत्तमः । प्रतिष्ठां विधिवत् कुर्य्यात् ततोऽधिकफलं लभेत् ॥
प्रतिष्ठा के बाद मुख्य के अनुसार निम्न मंत्रों का जप करके रुद्राक्ष को धारण करें–ततो यथा स्वमन्त्रेण धारयेद्भक्तिसंयुतः ॥ एकादिचतुर्द्दशवक्त्राणां संस्कारे प्रत्येकं क्रमेण मन्त्रा यथा ।
ॐ ॐ भृशं नमः । १ । ॐ ॐनमः । २ । ॐ ॐ नमः । ३ । ॐ ॐ ह्रीं नमः । ४ । ॐ हूं नमः । ५ । ॐ हूं नमः । ६ । ॐॐ हूं हूं नमः । ७ । ॐ नमः । ८ । ओं हूं नमः । ९ । ॐ हूं नमः । १० । ॐ ह्रीं नमः । ११ । ॐह्रीं नमः । १२ । ॐ क्षां क्षौं नमः । १३ । ॐ नमो नमः । १४ ।

विशेष बातें

27 रुद्राक्ष की माला धारण करके किए गए कार्य कोटि गुणा फलदायक होते हैं-सप्तविंशतिरुद्राक्षमालया देहसंस्थया । यः करोति नरः पुण्यं सर्व्वं कोटिगुणं भवेत्।।
रुद्राक्ष पहने हुए यदि कुत्ता भी मर जाता तो वह भी रुद्रपद प्राप्त करता है ।
ऐसा रुद्राक्ष का महत्व है-
रुद्राक्षे देहसंस्थे तु कुक्कुरो म्रियते यदि । सोऽपि रुद्रपदं याति किं पुनर्मानवा गुह ॥
#विशेष-
रुद्राक्ष और शिवलिंग स्थूल अर्थात् बड़े आकार के ही विशेष फल प्रदान करते हैं।
शालग्राम और नर्मदेश्वर जितने सूक्ष्म अर्थात् छोटे रूप में हों उनका महत्व अधिक होता है–
रुद्राक्षं शिवलिङ्गञ्च स्थूलं स्थूलं विशिष्यते । शालग्रामो नार्म्मदञ्च सूक्ष्मः सूक्ष्मो विशिष्यते ॥ “ इति मेरुतन्त्रे

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