लाल किताब के अनुसार केतु
लाल किताब के अनुसार केतु पुरुष संतान है, यात्रा है। ये जातक के कान और रीढ़ की हड्डी है। ये साधु/फकीर है। ये एक ऐसा ग्रह है जो डिटैचमेंट अकेलेपन, अधूरेपन और खालीपन को दर्शाता है।
केतु का बड़ा दुश्मन चंद्रमा है। बुध भी केतु का शत्रुस्वभाव वाला है। इसलिए जब भी केतु और बुध एक साथ बैठे हो तो सब काम अटक अटक कर बनते हैं।
लालकिताब में केतु को गुरू का चेला भी कहा गया है। इसलिए केतु को ठीक करने के लिए गुरु के उपाय भी किए जाते हैं।
अलग अलग भावों में केतु
1 केतु यदि प्रथम भाव में हो तो उस जातक के चेहरे पर एक निशान जरूर होता है जो दिखाई देता है। ये तिल हो सकता है या कट हो सकता है। जैसे ही ये आदमी 25 साल से ऊपर बढ़ने लगते है तो इनके पैरों में, कानों में, रीढ़ में अथवा मूत्राशय की बिमारियां बढ सकती हैं। केतु जब प्रथम भाव में होता है तो यह आसानी से संतान नहीं होने देता परन्तु पुत्र सन्तान का सुख अवश्य देता है। इनकी इन्ट्यूशन अच्छी होती हैं परन्तु साथ ही कन्फ्यूजन भी रहती है। यदि ये प्रथम भाव में होता है तो व्यक्ति किसी भी विषय में दूसरों से बार-बार पूछता है दूसरों से वैलिडेशन लेता रहता है। केतु प्रथम भाव वाला व्यक्ति या तो डैड एंड वाले घर में या कॉर्नर वाले घर में रहता है। केतु के प्रथम भाव में होने से भतीजों का सुख मिलता है। भतीजे, इनसे सहानुभूति रखते हैं।ये जातक को लम्बी दूरी की यात्राएं करवाता है। ये जातक को 28-35 की उम्र में समुद्री यात्राएं करवाता है। इनको कान में सोने की मुद्री अवश्य पहननी चाहिए। कम से कम एक तोला सोने की चैन पहननी चाहिए। इन्हें केसर का तिलक लगाना चाहिए। जननांगों में समस्या नहीं होगी स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। रविवार के दिन बंदरों को गुड़़ का दान करें।
2 केतु यदि दूसरे भाव में हो तो ऐसे लोग जितनी ज्यादा यात्राएं करते हैं उतना ज्यादा कमाते हैं। इनकी यात्राएं बंद तो इनकी कमाई बंद। इनको चाहे काम न हो फिर भी छोटी-छोटी यात्राएं करते रहना चाहिए। दो-तीन महिने में एक बार यात्रा अवश्य करें। पैसा आएगा परन्तु जमा नहीं होगा। ये लोग लोग सीधी बात बोलने वाले होते है। केतू बहुत अमीर बना सकता है बशर्ते जो चीजें पसंद आएं उनको खरीदते रहे। | कपड़ा, मोबाइल जो भी हो। दूसरे भाव का केतु थायराइड की समस्या देता है। 30 की उम्र से पहले बाल हल्ले सफेद होने लगते हैं। किसी न किसी चीज को इक्कट्ठा करने का शौक होता है। इनके ठोडी पर तिल या कट हो सकता है। है। ये आसानी से एक जगह नहीं बैठ पाते। ये अपने पैसे को खर्च करते रहेंगे तो अच्छा रहता है।हल्दी का तिलक लगाएं। कैंसर तिलक लगाएं। कुते को रोटी डालें। जब भी मंदिर जाएं तो दंडवत प्रणाम अवश्य करें।
3 केतु जब किसी के तृतीय भाव में हो तो इनको दक्षिणमुखी मकान में नहीं रहना चाहिए। जीवन में अकेलापन बढ़ पाता है। बार-बार नजर लगती है। मेहनत ज्यादा होती है फल कम मिलता। है। तीसरे भाव के केतु वाले जातक मदद को हमेशा याद रखते हैं और सदा वापस करते रहते हैं। इनको किसी को मना करना नहीं आता। इनकी दूसरी और तीसरी संतान खराब हो जाती भाई इनसे दूर रहता है या भाई से बनती नहीं है अथवा इनका भाई कैरियर में कठिनाई का सामना करता है। ये ज्यादा मेहनती नहीं होते स्मार्टवर्क करते हैं।तीसरे भाव का केतु विदेश में स्थाई निवास दे सकता है। उपाय: चने की दाल 1 किलो 43 दिन तक लगातार मन्दिर में दान करें। केसर का तिलक लगाएं। सोने की चैन पहन कर रखें। South Facing मकान में बाहर की तरफ आयताकार शीशा लगाकर रखें।
4 केतु जब चौथे स्थान में हो तो शुगर होने की ज्यादा सम्भावना रहती है। जितनी शिक्षा प्राप्त करने की सोचते हैं उतनी नहीं कर पाते। शिक्षा में ब्रेक मिल सकता है। विदेश में स्थाई निवास की सम्भावना है। गर्भाधान बहुत देर से होता है। संतान देर से होती हैं। चतुर्थ भाव में केतु वाले जातक के पैदा होने के चार या पांच वर्ष के अंदर निवास बदल जाता है। बहुत अच्छे सलाहकार होते हैं। इनके पास धन की कमी नहीं होती पैसा आता रहता है। ये बचपन में हस्तमैथून करते रहते हैं। इसलिए बच्चे भी देर से होते हैं। ये Over Thinking करते हैं। घर में काला कुत्ता पालें। सोने की-चैन / बाली पहनें। चांदी का ब्रेसलेट पहने । महिलाओं को चांदी की पायल पहननी चाहिए।
5 केतु पंचम भाव में हो तो संतान सुख मैं बाधा उत्तपन्न करता है। या तो संतान होती नहीं यदि होगी तो दूर चली जाएगी। इनकी किसी एक संतान का वैवाहिक जीवन खराब होता है। इनके तवे का हैंडल टूटा होता है। ये हो तो उसी दिन नया तवा लें। पंचम भाव का केतु बहुत विद्वान ज्योतिषी बनाता है इनके बताए उपाय लोगों को लगते हैं। इनको पेट में दिक्कत होती है। इनको वैवाहिक जीवन में समस्या होती है। पुत्र का सुख नहीं मिल पाता है, पुत्र हो सकता है परन्तु सुख नहीं मिल पाता है। आध्यात्मिकता बहुत फायदेमंद होती है। ये अच्छा हिलर बनाता है। ऐसे जातक 24 वर्ष के बाद कमाने लगते हैं। दूध और शक्कर दान करना है। 13 शनिवार तक दूध अलग- शक्कर अलग। ‘केसर तिलक लगाएं। सोने की चैन धारण करें। मुद्रीपहनें।
6 केतु जिस भी जातक के छठे भाव में होगा इनके मामा की वित्तीय स्थिति अच्छी हो तो केतु अच्छा है। वितीय स्थिति खराब हो तो केतु खराब है। खराब केतु मामा की स्थिति खराब करता है। छठे भाव का केतु नर संतान से दुखी रखता है। नर संतान तो होगी परन्तु दुखी रखेगी। बात नहीं मानेगी या उसके कारण समस्या उठानी पडेंगी। ये बहुत अच्छा वकील, डॉ और ज्योतिषी बनाता है। इनको कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे इनको कोई बिमारी है। इनको बिमारी का कारण समझ नहीं आता। ऐसे जातक अच्छे सलाहकार होते हैं। इनके जो दोस्त होते हैं वो इनसे चिढ़ने लग जाते हैं या पीठ पीछे इनका बुरा करने लग जाते है। त्वचा की विमारी हो जाती है। *यदि चंद्रमा द्वितीय और केतु छठे हो तो माता की सेहत बहुत खराब हो सकती है। खुद का बुढापा भी खराब हो सकता है। किडनी और लिवर की समस्या हो सकती हैं। उपाय- केसर तिलक लगाएं हर रोज और कुत्ता जरूर पालें। स्वर्णभस्म दूध में डालकर पीएं।
7 केतु यदि सप्तम स्थान में हो तो ये वैवाहिक जीवन खराब करता है। डायवोर्स हो जाता है। यदि कोई जानबूझकर इनसे शत्रुता करता है तो जो परेशान करने वाला है वह खुद दुखी रहता है। इनके सामने वाले घर में जो रहते हैं उनके घर में बहुत समस्याएं होती है नर संतान की समस्या भी हो सकती है या इनके सामने खाली प्लाट होता है। दूसरी संतान से इनको ज्यादा लाभ मिलता है। ये झूठे वादों के प्रयुद्ध, मिलता है। शिकार होते हैं। ये लोग झूठे वादों के शिकार होते हैं। ऐसा जातक जो वादे करता है उनको निभा नहीं पाता। सप्तम भाव केतु वाले जिन पुरुषों की शादी हो जाए उनको जोरू का गुलाम बनकर रहना चाहिए । उपाय – गाली-गलौच भूलकर भी करें। केसर तिलक लगाएं। केले के पेड़ पर हर वीरवार हल्दी का जल चढ़ाएं। सोने की चैन पहनें।
8 केतु जब किसी जातक के आठवें भाव में हो तो उसे अपनी मौत का कुछ समय पहले पता चल जाता है। कुछ बुरा होने वाला हो तो पता लग जाता है। इनको अपने पुत्र से समस्याएं मिलती हैं। इनको नींद की परेशानी होती है, ये या तो बहुत ज्यादा सोते हैं या बहुत कम सोते हैं। इनके भाईयों में काम की समस्या हो सकती है। शुगर और मूत्राशय की समस्या हो सकती है। पुत्र न होने समस्या का सामना करना पड़ता है। पुरूष जातक की पत्नी की सेहत हमेशा खराब रहती है। 26 वर्ष की उम्र के बाद पारिवारिक कलह बढ़ सकता है।
उपाय- गणेश जी की पूजा करें। साल में कम से कम एक बार
काले और सफेद कम्बलों का दान करें।
9 नौवें भाव का केतु हो तो इनका भाग्य पुत्र संतान से जुड़ा होता है जैसे जैसे पुत्र बड़ा होगा भाग्य भी उन्नत्ति करेगा। इनके अंदर आध्यात्मिक ऊर्जाओं का वास होता है कोई एक ऊर्जा इनके माध्यम से समाज की भलाई का काम करवाती रहती है। घर में सोना इक्कट्ठा हो जाता है नहीं हो एक जगह सोना इक्कट्ठा करें। पहली संतान नर/ पुत्र होती है। घर में कुता होता है। लालकिताब के अनुसार नौवें भाव में केतु का होना बहुत अच्छी स्थिति है परन्तु वैदिक ज्योतिष के अनुसार नौवें भाव का केतु पितृ दोष बनाता है।नौवें भाव का केतु सोना देता है। उपाय: इनको सोने की ईंट/ सोने का सिक्का/ ज्वैलरी अपने बैडरूम में जरूर रखनी चाहिए, उसको कभी न बैचें ना किसी को दिखाए । भूलकर भी अपना सोना ना तो बैचें और ना ही गिरवी रखें ना ही चोरी होने दें और ना खोने दें। इनके जीवन में जब भी कभी सोने (Gold) का नुकसान होगा तो सोने के नुकसान के साथ ही बहुत बड़ी समस्या घर में आयेगी। यदि किसी कारण से सोना बेच रहे हैं तो उसी समय थोड़ा बहुत Gold वापिस खरीदकर घर अवश्य लाएं।
10 दसवें भाव का केतु जातक को आराम पसंद व्यक्ति बनाता है। ऐसा जातक बहुत सारे काम बदलता है। घुटने पर चोट का निशान या तिल हो सकता है। ऐसे व्यक्ति यदि केतु का ही बिजनेस करें तो अच्छा है। इनके चरित्र हानि के बहुत बार आसार बनते हैं। ऐसा कभी न करें। उपाय: चांदी का छोटा सा लौटा दक्कन सहित शहद भरकर / असली शहद मोली से बांधकर घर के पश्चिम दिशा में रखें। 43 वर्ष की उम्र के बाद कुत्ता अवश्य पालें।
11 ग्याहवें भाव का केतु माता को शारीरिक समस्या देता है। बच्चे के जन्म के समय शारीरिक और मानसिक दुःख से गुजरना पड़ता है। ये लोग जिस भी सपने के पीछे भागते हैं वो कभी मिलता नहीं है। ग्यारहवें भाव केतु वाले अपने सपनों को चेज न करें और छोटे-छोटे गोल बनाएं। ये पुरुषों के स्पर्मकाऊंट को कम कर सकता है। यदि इनका चंद्रमा पहले घर में हो तो किडनी की समस्या हो सकती है। चंद्रमा कहीं बैठे उसे खराब कर देता है। ये जातक अपने भविष्य के बारे में सोच सोचकर परेशान होते हैं। उपाय-: काले ऑनिक्स (Onyx) का ब्रेसलेट पहनें। सोने की भस्म का सेवन करें। मंगलवार से शुरू करके ग्यारह मूली रात को अपने सिहराने रखें और सुबह उठकर मंदिर में देकर आएं 43 दिन तक लगातार दान करें। ( मंदिर बदल सकते हैं।)
12 केतु बारहवें भाव में हो तो इनके बारे में कहा जाता है कि ये जन्म उनका आखिरी जन्म है। गुरू बाहरवें भाव में हो तो भी अन्तिम है। द्वादश भाव का केतु विदेश में निवास देता है। इनको सभी समस्याएं, छोटी लगती हैं। इनके घर में छिपकलियां बहुत रहती हैं। द्वादश भाव का केतु हर तरह की सुख-सुविधा से जातक के जीवन को भर देता है। ये लोग जितना ज्यादा यात्रा करेंगे उतना ज्यादा फायदा होता है। इनको अंगूठा चूसने की आदत या नाखून खाने की आदत होती है। इनका माफ करने वाला स्वभाव होता है। उपाय:- शादी वाली अंगूठी हमेशा पहनकर रखें। गणेश जी की पूजा करें।
बाहरवें भाव में केतु वाले 30% लोगों को नींद की समस्या हो सकती है। उपाय सौंफ को लाल सूती कपड़े में बांधकर सिरहाने रखें 20-25 दिन में आराम मिलेगा।
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