वास्तु-शास्त्र सार

इस ग्रंथ का अध्ययन करने के बाद पाठक Vastu Shastri सामने वाले के घर पर जाए बिना ही उसकी समस्याएं सुनकर उसके घर में कहां वास्तु दोष( Vastu Dosha )है यह शत प्रतिशत बता सकते हैं। यह ग्रंथ चमत्कृत करने वाला पहला ऐसा ग्रंथ है जो प्राचीन शास्त्रों को अनुभव की कसौटी पर कसकर लिखा गया है। इसको पढ़ लेने के बाद वास्तु शास्त्र Vastu में अन्य पढ़ना शेष नहीं रहता है ।

यह ग्रंथ नास्तिकों को भी आस्तिक बनाकर उनका विश्वास हासिल करता है। जो कि उनकी समस्या जानकर किया जा सकता है।

जीवन में आने वाली समस्त बाधाएं हों या उपलब्धियां हों वे दैवीय व्यवस्था के अनुसार आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक इन तीन स्तरों पर अनुमोदित होकर हम तक पहुंचती हैं।

आध्यात्मिक व्यवस्था में परमात्मा की कृपा आती है। यह बहुत प्रबल होती है। यदि व्यक्ति पूर्णतया आध्यात्मिक स्वभाव वाला है तो उसे आधिदैविक और आधिभौतिक स्तर से आने वाली समस्याएं कम आती हैं और जो आती भी हैं तो ऐसा व्यक्ति उनको गिनता ही नहीं है, वे उसे विचलित नहीं कर पाती हैं।

आधिदैविक व्यवस्था में देवताओं की उपासना और कृपा की अहं भूमिका रहती है। यदि एक भी ऐसा व्यक्ति किसी परिवार में निवास करता है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। वह व्यक्ति बहुत सी वास्तु आदि समस्याओं को अपनी उपासना से निरस्त कर देता है। लेकिन उसके जाने के बाद वास्तु समस्याएं हावी हो सकती हैं। जन्मकुंडली Horoscope के ग्रहों का प्रभाव भी इसी श्रेणी में आता है।

आधिभौतिक व्यवस्था में जिस मकान में हम रहते हैं उसका पूरा प्रभाव वहां रहने वाले व्यक्तियों पर पड़ता है। अतः आस्तिक हों या नास्तिक, जो जिस भूखंड पर निवास करता है वहां की उर्जाएं Energies वहां के निवासियों को अवश्य प्रभावित करती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार वास्तु पुरुष Vastu Purusha को भी देवता माना तथा भूखंड या भवन के प्रत्येक स्थान पर वास्तु शास्त्र के देवताओं की स्थिति तथा ग्रहों का प्रभाव होता है इसलिए यह केवल भौतिक प्रभाव न होकर आधिभौतिक प्रभाव कहा गया है।

 प्राचीन ऐतिहासिक नगर लंका,  इन्द्रप्रस्थ,  भगवान् श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका आदि वास्तु शास्त्र के अनुसार बने नगर थे।

Vastu According To Horoscope

आपकी जन्मकुंडली Horoscope में जो ग्रह स्थित हैं वे ही ग्रह व्यक्ति के भवन की जमीन में भी स्थित होते हैं। अतः कुंडली Horoscope में जो ग्रह कमजोर होते हैं तो उस व्यक्ति को जो मकान रहने के लिए मिलता है उसमें भी उन्हीं ग्रहों Planets की दिशाएं प्रभावित रहती हैं। कुंडली तो जन्मजात रहती है लेकिन हम रहने के लिए मकान तो वास्तु शास्त्र के अनुसार इस हिसाब खरीद सकते हैं जिसमें ग्रहों का अच्छा फल मिले। इसलिए वास्तु शास्त्र के अनुसार इतना तो हम कर ही सकते हैं।

वास्तु शास्त्र विस्तृत शास्त्र है। सामुद्रिक, गणित, ज्योतिष, छन्द, शिराज्ञान, शिल्प, यन्त्रकर्म और विधि वास्तुशास्त्र के आठ अङ्ग है।

सामुद्रं गणितं चैव ज्योतिषं छन्द एव च । सिराज्ञानं तथा शिल्पं यन्त्रकर्मविधिस्तथा ॥ एतान्यंङ्गानि जानीयाद् वास्तुशास्त्रस्य बुद्धिमान् । शास्त्रानुसारेणाभ्युद्य लक्षणानि च लक्षयेत् ॥

इसलिए वास्तु शास्त्र Vastu Shastra भी महत्वपूर्ण शास्त्र है।

घर की तो सबको आवश्यकता रहती है। व्यक्ति का घर के बिना कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता है – गृहस्थस्य सर्वाः क्रिया गृहमन्तरा न सिद्धयन्ति ।। वास्तुरत्नाकरे।

शास्त्र कहता है कि दूसरे के घर में रहकर यदि कोई व्रत,जप आदि धार्मिक कार्य करते हैं तो उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। उसका फल भूमिपति को प्राप्त होता है –

 परगेहे कृताः सर्वाः श्रौतस्मार्तक्रियाः शुभाः ।

निष्फलाः स्युर्यतस्तासां भूमीशः फलमश्नुते ॥ मात्स्ये।

इसलिए अपना ही मकान रहे तो उत्तम रहता है।

इस विषय के अनेक ग्रंथ ऋषियों ने लिखे हैं तथा सैकड़ों ग्रंथ आधुनिक लेखकों ने भी लिखें हैं। मैंने समस्त पुरातन और नवीन लेखकों के ग्रंथों का गहन अध्ययन करके यह ग्रंथ तैयार किया है। पुराने लेखकों गूढ़ बातें संकेतों में कही है उसको सरल करके यहां लिखा गया है। नये लेखकों में यह कमी है कि उन्होंने अनेक पुराने ऋषिकृत महत्वपूर्ण सूत्रों को संस्कृत भाषा समझ में न आने के कारण छोड़ दिया है। इस ग्रंथ में उपरोक्त सभी तथ्यों को समाधान पूर्वक लिखा गया है। इस ग्रंथ से आप जान पाएंगे कि

Home Vastu

१. मकान के लिए सही दिशा का चयन कैसे करें? Right Direction For Home

२. यदि घर में दिशाओं के अनुसार पृथ्वी, जल अग्नि वायु और आकाश इन पांच तत्त्वों की अधिकता या कमी हो जाए या एक दूसरे के विरोधी तत्त्व स्थापित हो जाएं वहां रहने वाले व्यक्तियों के शरीर में भी उनका बेलेंस बिगड़ जाता है तथा कार्य क्षेत्र और व्यवसाय भी प्रभावित हो जाता है। पंच तत्वों का बेलेंस कैसे रखें ? How to balance five elements

३. ब्राह्मण आदि वर्ण के अनुसार रहने योग्य उपयुक्त नगर व दिशा कौनसी होनी चाहिए ? Right town and direction for four varana

४. ब्राह्मण आदि वर्ण के अनुसार फर्श का रंग कैसा होना चाहिए ? Right floor colours according to four varana

५.  ब्राह्मण आदि वर्ण के अनुसार भूमि का ढलान किस दिशा की ओर रहना चाहिए ? Slobe according to four varana

६.  कूर्मपृष्ठ आदि भूमि में किसका चयन करें ? How to choose auspicious land

७. घर के पास में कैसे पेड़ आदि हों  ? Trees near home

८. काकिणी से कौन व्यक्ति किस नगर में रहे ? नगर चयन के बाद भी उसी नगर के किस भाग में रहें ? How to choose auspicious city for home

९. प्लाट की आकृति कैसी हो ? Right dimensions for properties according to Vastu Shastra

१०.  किस दिशा की ओर खिड़कियाँ दरवाजे अधिक हों ? Direction for Windows and Doors

 ११. किसी दिशा में भूमि वृद्धि या कटाव का क्या फल है ? Extensions And Resection According To Vastu Shastra

१२. किस दिशा में सीढियां कहां बनाएं ? कहां ज्यादा खुला स्थान नहीं रखना चाहिए ? Direction for stairs and open area

१३. भवन में पीलर (खम्बे) कितने हों ? How many pullers in property

१४. गर्भवती महिलाओं के लिए कौन सी दिशा बेहद ही महत्वपूर्ण है ? Auspicious direction for pregnant lady

१५. राजनैतिक सफलता में कौनसी दिशा जिम्मेदार है ? सामाजिक सम्बन्ध किस दिशा में वास्तु दोष होने से बिगड़ते हैं? Auspicious directions for political career

१६. किस दोष के कारण आपके घर लोगों का आना जाना लगा रहेगा , या आते ही नहीं या गेस्ट कम आते हैं ? Vastu Dosh for guests

१७. दंपति की दूरियों के लिए किस दिशा का बेड जिम्मेदार है ? Cause directions for divorce and separation in life

१८. प्रभावशाली और आकर्षक व्यक्तित्व कौनसी दिशा बनाती है ? Direction for attractive personality

Office Vastu, Commercial Vastu

१९. कारोबार, पदोन्नति और लोकप्रियता की दिशा कौनसी है ? इसके लिए क्या करें? Direction for publicity

 २०. निर्णय लेने की क्षमता किस दिशा के दोष से है ? समस्या कैसे कम हो ? Direction for right decision

२१. धन के आगमन को कौनसा वास्तु दोष प्रभावित करके कंगाली शुरू कर देता है? Vastu Dosh the real cause of bankruptcy

२२. आत्मविश्वास किस दिशा दोष से डगमगाता है ? Real cause of loose confidence

२३. आर्थिक रुप से कौनसी दिशा मजबूत करती है ? Direction for wealth creation

२४. किस वास्तु दोष को हटाने से उधार नहीं फंसेगी ? Vastu dose who create udhar

२५. बच्चों की किताबें कहां रखने से पढ़ाई में उनका मन नहीं लगेगा ?

Direction for education

  २६. किस स्थान पर वह वस्तु रखकर आप किसी व्यक्ति की बुरी लत छुड़वा सकते हैं ? How to leave addiction

२७.  घर में कौनसी दिशा दूषित होने पर बुरी उर्जाओं का घर में संचार होने लग जाता है और धीरे धीरे पूरे घर का माहौल बिगड़ता ही चला जाता है। घर में रहने वाले लोग भ्रमित रहने लगते हैं, घर में मशीनी उपकरणों का खराब होना लगा रहता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमार होने पर भी आप बिमारी को ढूंढ नहीं पाते हैं। इलाज कराना चाहते हैं लेकिन बीमारी नहीं पता चल पाती है। यह आपके घर में परिवार के उपर प्रजनन पर भी असर डालता है, या तो संतान नहीं होती नहीं है अगर होती भी है तो नष्ट हो जाती है,खासकर पुत्र संतान नहीं होती है ? Real Cause of dirty energies pollution of directions which creates disturbance in all areas of life

२८. किस दिशा में दोष हो तो देव कृपा आपके घर पर बिल्कुल भी नहीं आएगी ? घर में कलह का माहौल बना रहता है ? भूत प्रेत जैसी चीजें घर में नजर आने लगेंगी, मन में एक अलग ही डर बना रहेगा ? Vastu Dosh cause of fear

२९. सबसे अधिक वास्तु दोष किस स्थान से आते हैं ? The place who creates more Vastu Dosha

३०. किस दिशा में दोष होने पर पुरुषों की संख्या घर में कम होने लगेगी ? Vastu Dosha who decrease mens counting in home

३१. किस वास्तु दोष से घर के बाहर ही अधिक मन लगता है, घर आने का मन नहीं करता है ? Vastu dosh who create detachment from own home

३२. घर में कहां पर रखी हुई चीजें अपनी ओर आकर्षित करती है ? उन चीजों में रुचि खुद बढ़ने लगती है ? Vastu zone who attract other

३३.कौनसी दिशा आपके बच्चों के लिए बहुत अधिक मायने रखती है ? इस दिशा से इच्छा शक्ति तो जागृत होती ही है इसी के साथ ये स्टोरेज का क्षेत्र भी है यानि कि जो आपके बच्चे पढ़ेंगे वो याद रखेंगे। Direction to enhance willing power and store

३४. कहां गेमिंग प्रोग्राम न रखें क्योंकि बच्चे उसमें खो जाएंगे ? कूड़ेदान की दिशा कौनसी है ? Zone for dustbin

३५. घर में तिजौरी, खजाना बनाएं ? Direction for Tijori

३६. प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा की कौन-सी दिशा है ? Direction of publicity and Reputation

३७. जन संपर्क का कौन सा क्षेत्र (connectivity) है।

३८. किस दिशा को पढ़ाई का क्षेत्र कहा जाता है? Vastu zone for education

३९. धन की बचत का क्षेत्र भी कहा गया है? Directions for saving

४०. किस दिशा की उर्जा सही है तब आप जो भी काम करेंगे उसमें आपका भाग्य आपका साथ देगा ?

४१. निरंतर मेहनत करने के बाद प्रयास करने के बाद भी आपको फल नही मिल रहा है तो उसमें घर की किस दिशा का बहुत बड़ा हस्तक्षेप है ? Vastu dosh which is the main cause of failure more times

४२. यदि काम और लाभ धीमा हो गया है तो कौनसी दिशा प्रभावित है ? Vastu dosh which make things slow

४३. कौनसी दिशा खराब है तो किसी से भी सहायता नहीं मिलेगी चाहे कितने ही नजदीकी संबंधी या  दोस्त हों ? Directions for backups according to vastu

४४. कौन-सी जगह बेहद सटीक है क्योंकि यहां पर रखी हुई चीजें धीरे धीरे खत्म होने लगती है ? ऐसे में रोस्टोरेंट में इधर किचन बनाना सर्वोत्तम होता है। बिजनेस के लिहाज से ये दिशा बेहद ही महत्वपूर्ण है। बिक्री योग्य वस्तुओं के लिए ये जगह बेहद लाभदायक है क्योंकि ये चीजें यहां रखने से उनकी बिक्री बढ़ जाएगी। Right direction for restaurant kitchen according to vastu

४५. दोस्तों और पूर्वजों से मदद किस क्षेत्र पर निर्भर करती है ? Vastu direction for pitari pooja and friends suport

४६. नवविवाहित जोड़े के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए कौन सी दिशा उत्तम है ? Auspicious zone for newly merreid couple

४७. किस दिशा में वास्तु दोष होने से घर की महिलाएं बाहर गैर पुरुषों से आकर्षित होने लगती हैं ? जिससे पति-पत्नी के बीच झगड़े होने लगते हैं। Direction who creates extra marital affairs

४८. किस दिशा से बिजनेस में भी तरक्की मिलती है ? कौनसा दिशा क्षेत्र करियर में आपको नई उंचाई पर ले जाता है ? Auspicious zone for business and career

४९. कौनसी दिशा वार्तालाप शैली को भी प्रभावित करती है ? अगर ये दिशा खराब होगी तो बच्चों को अपनी बात समझाने में परेशानी होगी।

५०. किस दिशा में दोष होने पर बहन बेटी और बुआ तीनों की जिंदगी  में बाधाएं आने लगती हैं ? Vastu dosh who create struggle in women’s life at home

शरीर में होने वाली सभी बिमारियों की वृद्धि में भी वास्तु दोष की अहम भूमिका रहती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार हम सोने की दिशा में थोड़े से परिवर्तन से ही बड़ी बड़ी बिमारियों से बच सकते हैं। इसलिए हमें पता रहना चाहिए कि —– Vastu dosh is the big cause to increment of diseases

५१. डिप्रेशन/मनोरोग कहां सोने से हो सकता है। अतः कहां पर लगातार सोने से बचना चाहिए ? Direction who create depression

५२.  मस्तिष्क रोग कहां सोने से होते हैं ? Zone who create mental illness

५३. इम्यून सिस्टम बेहतर कहां सोने से होता हैं ?

५४. कमर, घुटने की समस्या  कहां सोने से होगी ? Vastu dosh who create bach pain knee pain

५५. किडनी की समस्या कहां सोने से होती हैं ? Kidney diseases

५६. न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर कहां सोने से होता हैं ?

५७. अनिद्रा की दिक्कत,  सुस्ती कहां सोने से होती हैं ?

५८. पेट की समस्या कहां सोने से होती हैं ? Stomach Diseases

५९. पेट, दांत, पत्थरी, घुटने के रोग कैल्शियम की समस्या कहां सोने से होती हैं ?

६०.नींद या बेचैनी की समस्या कहां सोने से होती हैं ?

६१. कौनसी दिशा तंत्रिका तंत्र/ नर्व सिस्टम से है जिसमें वास्तु दोष से चक्कर आना, लकवा आदि रोग हो सकता है। Vastu dosh who create nervous disorder

६२. त्वचा में रूखापन की समस्या कहां सोने से होती हैं ?

६३. नसे सुखना तथा शरीर के अंदर नसों में खिंचाव होने की समस्या कहां सोने से होती हैं ?

६४. किस दिशा में वास्तु दोष हो तो इम्युनिटी सिस्टम खराब हो जाता है साथ ही उस व्यक्ति का पाचनतंत्र भी खराब रहने लगता है ?

६५.  किस दिशा में वास्तु दोष हो तो कैंसर जैसी बिमारी से लोग ग्रस्त हो सकते हैं। मुखिया या बड़े को कैंसर हो सकता है ? Big Vastu Dosh who are the main reason to create cancer disease

६६. कहां दोष हो तो व्यक्ति को डिप्रशन और माइग्रेन जैसी बीमारियां घेर लेंगी साथ ही मन में आत्महत्या जैसे विचार आते हैं।

६७. असंतुलित थायराइड का कारण कौनसी दिशा है ?

६८.किस दिशा में व्यक्ति लगातार सोता है तो उसे सर्दी, जुकाम और साइनस जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सर्दी ज़ुकाम बढ़ता है। थायराइड, साईनस रोग हो सकता है ?

६९. एक क्षेत्र ऐसा भी है जहां बैठने से आत्मविश्वास, एनर्जी व लाइफ  बढ़ती है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिशा पांच तत्त्वों के विकृत होने पर किसी न किसी रोग को उत्पन करती है। उस वास्तु दोष का निवारण यदि किया जाता है तो उस रोग का ईलाज जल्दी हो जाता है और दवाइयां भी असर दिखाने लगती है। जब तक वास्तु शास्त्र के उपाय न करें तो दवाईयां भी असर नहीं करती हैं। वास्तु शास्त्रानुसार घर में एक क्षेत्र ऐसा भी होता है अगर आप वहां दवाइयां रखेंगे तो रोगी के ठीक होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। भंडारण का भी एक क्षेत्र है। शांति का भी एक क्षेत्र होता है , वहां वाद विवाद या बहस न करनी चाहिए।

घर में या कमरे में दीपक/बल्ब /ट्यूब लाईट लगाने की भी एक दिशा होती है। इसका बहुत से आधुनिक वास्तुविदों को पता नहीं है ।

छत पर टंकी , वाटर टैंक , लिफ्ट, सीढियां बाहर से भीतर से ? बेसमेंट की दिशा तथा घर के अंदर की कौन-सी वस्तु कहां रखें ?? यह सब व्यवस्थित रूप से इस ग्रंथ में दे दिया गया है।

जीवन की समस्याएं घर के वास्तु से जुड़ी हुई होती हैं अतः इस ग्रंथ में समस्याओं के अनुसार निम्न उपायों को सरलता से समाधान दिया गया है —

१. भवन के किसी हिस्से में परिवर्तन द्वारा। Transformation in homes area

२. धातुओं का प्रयोग करके। Implementation of metallic things

३. विभिन्न रंगों का प्रयोग करके। Colour therapy

४. दीवारों पर उचित तस्वीरों द्वारा । Image Implementation on walls

५. फर्श पर उचित रंग की टाईल लगाकर  Colour therapy on floor

६. शौचालय को वैक्यूम करके।

७. जल निकासी परिवर्तन करके To Change in darenge

८. मुख्य द्वार परिवर्तन द्वारा। To Change in main door

९. घर को धातु की पट्टी से पार्टिशन करना। Partition with metallic stripes

१०. विविध वस्तुएं प्रयोग करके। Implementation of various things

इस ग्रंथ में व्यवसायिक भवन/फैक्ट्री/आफिस/स्कूल आदि के बारे में भी वास्तु शास्त्र के नियम समझाए गये हैं। व्यवसायिक समस्याओं का समाधान भी बताया गया है।

अंतिम अध्याय में वास्तु शांति, वास्तु पूजा, नींव रखने की दिशा, नींव पूजन तथा गृहप्रवेश की विधि भी दी गई है जिससे साधारण ज्ञान रखने वाले भी लाभान्वित हो सकते हैं।

कृष्ण चन्द्र शास्त्री

कुरुक्षेत्र

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